How Hanuman ji was not monkey explain

source: https://youtu.be/fU1fYScQaFc

In context of Ramayana Wanar word does not mean monkey

Parents of Hanuman ji

Father: kesari - The king of Sumer Mountain kshetra (area) Mother: anjani - daughter of King Kunjer from wanar linage

Elder Son: Hanuman ji (source: walmiki ramayan yudhhakand sarg 28, shlok 10) Younger 5 brothers: shrutiman, ketuman, matiman and ghrutiman (source: from pauranik linageawali sources)

History of Wanar Linage

  • originated from rishi pulha his spouse haribhadra
  • according to mother side of linage it is also called as hariwansh or harigan
  • later sub branches of this linage spread among whole bharatwarsh
  • in kishkindha 11 branches were spread: riksh, singh(sih), wanar, wyaghra, sharabh, dwipi, neel, shalyak, marjar, lohas and mayav
  • wanar word also known as nar(human) who lives in wan(forest)
  • walmiki ramayan uses wanorkash word for wanar people (which means residents of forest)
  • similar example known today is pahadi folks who lives near the mountain
  • and place which based on union of five rivers called punjab
  • like that folks who resides near the forest are known as wanar at that time.
  • The citizen of cities that based near the forests areas known as wanar and wanorkash

Ramayans references:

  • Ravana used word langul for burning his langul.
  • here langul word used for flag of the kingdom and not tail.
  • when hanuman goes to see sita mata in lanka he went with langul i.e. flag of his kingdom kishkindha which he was serving

हनुमान जी बन्दर नहीं थें इसका प्रमाण

स्रोत :

पिता : केसरी - सुमेर पर्वत के एक भाग के राजा माता : अनजनी - वानर वंश राजा कुञ्ज की पुत्री

जेष्ट पुत्र : हनुमान जी (स्रोत: वाल्मीकि रामायण, युद्धकाण्ड सर्ग 28, श्लोक १०) कनिष्ट ५ भ्राता : श्रुतिमान, केतुमान, मतिमान और घृतिमान (कुछ पौराणिक वंशावली स्रोतो से)

वानर वंश का इतिहास

  • इस वंश का मूल उद्भव ऋषि पुलहा और उनकी पत्नी हरिभद्रा से
  • माता के वंश के आधार पर से इसे हरवंश और हरिगण भी कहते थे
  • बादमे इस वंश के उपवंशीय शाखाये भारत वर्ष में फैली
  • किष्किंधा में ११ शाखाये थी जो की इस प्रकार से है: ऋक्ष, सिंह, वानर, व्याघ्र, शरभ, द्विपी, नील, शल्यक, मार्जर, लोहास और मायाव
  • वानर शब्द का एक यह भी अर्थ मिलता है की नर जो वन में रहते थे
  • और आश्रमव्यवस्था में तीसरे आश्रम वानप्रस्थ आश्रम पहुंचने वाले को वन में निवास करना होता है उन्हें वानप्रस्थी वा वनस्थ भी कहते है.
  • वाल्मीकि रामायण में वनो में रहने वालो के लिए वनोत्कर्ष शब्द का प्रयोग किया है
  • जैसे आज पहाड़ क्षेत्र में रहने वालो को पहाड़ी कहते है
  • पांच नदियो के मेल पर बसे क्षेत्र को पंजाब कहते है
  • वैसे ही वन क्षेत्र के आसपास बसे राज्यो को उस समय वानर और वनोकश कहा जाता था

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